कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई के दिन यह मनाया जाता है। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान हेतु मनाया जाता है। 1. शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मर-मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा। कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन, जय हिन्द जय भारत। 2. शहीद की शव यात्रा देख कर मुझमें भाव जगे, चाहता हूं तुझको तेरे नाम से पुकार लूं ए शहीद आ तेरी मैं आरती उतार लूं। शहीदों को नमन, जय हिन्द जय भारत 3. लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है, उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी। शहीदों को नमन, जय हिन्द जय भारत। 4. ज़िंदगी जब तुझको समझा, मौत फिर क्या चीज़ है, ऐ वतन तू हीं बता, तुझसे बड़ी क्या चीज़ है। कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन, जय हिन्द जय भारत। 5. हम ख़...
खुदीराम बोसः हाथ में गीता लेकर फांसी चढ़ने वाला लड़का खुदीराम बोस स्कूल के दिनों से ही राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे थे. वे जलसे जुलूसों में शामिल होते थे और अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ नारे लगाते थे. खुदीराम बोस खुदीराम बोस को देश की गुलामी सख्त नापसंद थी पढ़ाई छोड़ आजादी की जंग में कूदे थे खुदीराम बोस वो उम्र जब एक युवा अपने करियर और आने वाले भविष्य को लेकर परेशान रहता है, उस उम्र में एक ऐसा क्रांतिकारी निकला जो देश के लिए सूली पर चढ़ गया. महज 18 साल की उम्र में देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले खुदीराम बोस को 1908 में 11 अगस्त के ही दिन फांसी दी गई थी. खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर, 1889 को बंगाल में मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में हुआ था. खुदीराम बोस जब बहुत छोटे थे, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया था. उनकी बड़ी बहन ने उनका लालन-पालन किया था. 1905 में बंगाल का विभाजन होने के बाद खुदीराम बोस देश को आजादी दिलाने के लिए आंदोलन में कूद पड़े. सत्येन बोस के नेतृत्व में खुदीराम बोस ने अपना क्रांतिकारी जीवन शुरू किया. अंग्रेजी हुकूमत के थे खिलाफ खुदीराम बोस...
फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे, वो शमा क्या बुझे जिसे रौशन खुदा करे | काम करो ऐसा कि पहचान बन जाये; हर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जाये; यह जिन्दगी तो सब काट लेते हैं; जिन्दगी ऐसे जियो कि मिसाल बन जाये | रात नहीं ख्वाब बदलता है, मंजिल नहीं कारवाँ बदलता है; जज्बा रखो जीतने का क्यूंकि, किस्मत बदले न बदले , पर वक्त जरुर बदलता है | मैनें भी बदल दिये हैं, जिन्दगी के उसूल | अब जो याद करेगा, सिर्फ वही याद रहेगा | कुछ इस तरह मैंने जिन्दगी को आसां कर लिया किसी से माफ़ी मांग ली किसी को माफ़ कर दिया | डर मुझे भी लगा फासला देख कर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर, खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर हौंसला मत हार गिरकर ऐ मुसाफिर अगर दर्द यहाँ मिला है, तो दवा भी यहीं मिलेगी | Contact us 6205164177,95231474 
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